निर्माण घोटाले की गूंज: रेंजर अटैच, अब किसकी बारी?
कोरिया वन मंडल में निर्माण घोटाले की गूंज: प्रभारी रेंजर अटैच, अब बड़े अधिकारियों पर उठे सवाल
क्राईम पथ दीपेंद्र शर्मा कोरिया वन मंडल में निर्माणाधीन कार्यालय भवन को लेकर उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं, गुणवत्ता में लापरवाही और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों के बीच विभाग ने प्रभारी रेंजर शैलेश कुमार गुप्ता को कार्यालय अटैच कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
निर्माण कार्य पर शुरू से उठ रहे थे सवाल
जानकारी के अनुसार, नव-निर्माणाधीन कार्यालय भवन के निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। आरोप है कि विभाग में तकनीकी अमले की उपलब्धता के बावजूद निर्माण कार्य की निगरानी निजी इंजीनियरों और ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दी गई थी। इससे निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े हो गए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि भवन का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन कई हिस्सों में कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं। यही वजह है कि पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बाकी
प्रभारी रेंजर को कार्यालय अटैच किए जाने को विभाग की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। यदि निर्माण कार्य में वास्तव में अनियमितताएं हुई हैं तो इसकी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं हो सकती।
डीएफओ की भूमिका भी चर्चा में इस पूरे मामले में वन मंडलाधिकारी प्रभाकर खलखो की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य में यदि गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आई हैं तो विभागीय निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा होनी चाहिए। आखिर निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही थी और शिकायतों के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए, खर्च किए गए सरकारी धन का ऑडिट कराया जाए और जो भी अधिकारी या ठेकेदार दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
अब आगे क्या?
प्रभारी रेंजर के अटैच होने के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग जांच को कितनी गंभीरता से आगे बढ़ाता है। क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहेगी या फिर जांच की आंच उन जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचेगी जिनकी निगरानी में यह पूरा निर्माण कार्य हुआ?
फिलहाल, कोरिया वन मंडल का यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही, निर्माण गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है, जिनका जवाब जनता जानना चाहती है।


